andaj nirale h
मेरे अंदाज बिल्कुल निराले हैं देखने में भले ही काले हैं ।। होठों की हसरतें कहने वाले हैं कैसे कहूं जुबां पर लगे ताले हैं।। देखने में सादे दिल दिलवाले हैं देखने में भले ही काले हैं ।। मौसम भी करवट लेने वाले हैं दुश्मन भी दोस्त बनने वाले हैं ।। अब घाव फिर जग ने वाले हैं अपने घर में जो दुश्मन पाले हैं।। अब नहीं प्यार करने वाले हैं सब दूसरे के खून के लाले हैं।। कोई नहीं तरूण कहने वाले हैं सबका सोच बूढ़ा होने वाले हैं ।। ✍✍✍तरुण यादव रघुनियां