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Showing posts from April, 2019

मन बहुत दीवाना है

यह मन बहुत दीवाना है प्रभु में इसे लगाना है प्रभु का गुणगाना है इसी में इसको रमाना है।। यह मन बहुत परवाना है इस पर लगाम लगाना है 84 के चक्कर में नहीं जाना है इसलिए सत्संग में रामाना है।। यह मन बहुत दीवाना है माया इसका निशाना है इनसे इसको छुड़ाना है सद्गुरु के शरण में में ले जाना है।। यह मन बहुत दीवाना है जल्दी बस में नहीं आना है इसको सत्संग में ले जाना है जप से लगाम लगाना है।। गुरु से विनती करना है सत्संग गुरु भक्ति मांगना है इस मन को उस के दौराना है अलौकिक शक्ति पाना है।।

सत्संग में मिलता ज्ञान

सत्संग में मिलता ज्ञान दूर होता अज्ञान मनुष्य तन पाने का मिलता सत्य ज्ञान अमरलोक जाने का है यह स्थान.। सत्संग में मिलता ज्ञान दूर होता अज्ञान करने से जाता परमधाम अंत में पाता मुक्तिधाम।। सत्संग में होता ज्ञान यह है सब सुखों का नाम यहां मन को मिलता है विश्राम यही है प्रभु का निज धाम ।। सत्संग में मिलता ज्ञान यह है अमृत धाम यहां पाते अलौकिक ज्ञान आवागमन का चक्र का होता अवसान.।।...

Meditation

Meditation शुन्य गतं मनः ध्यान । शुन्यगत मन को ध्यान कहते हैं एक तरह से मन की एकाग्रता को ध्यान कहते हैं मन का निर्बिषय होने को भी ध्यान कहते हैं जब मन से सभी तरह के इच्छा का नाश होंने लगता है तो उसे ध्यान कहते हैं ।