मन बहुत दीवाना है
यह मन बहुत दीवाना है
प्रभु में इसे लगाना है
प्रभु का गुणगाना है
इसी में इसको रमाना है।।
यह मन बहुत परवाना है
इस पर लगाम लगाना है
84 के चक्कर में नहीं जाना है
इसलिए सत्संग में रामाना है।।
यह मन बहुत दीवाना है
माया इसका निशाना है
इनसे इसको छुड़ाना है
सद्गुरु के शरण में में ले जाना है।।
यह मन बहुत दीवाना है
जल्दी बस में नहीं आना है
इसको सत्संग में ले जाना है
जप से लगाम लगाना है।।
गुरु से विनती करना है
सत्संग गुरु भक्ति मांगना है
इस मन को उस के दौराना है
अलौकिक शक्ति पाना है।।
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