सहारा चिट्ठी और संदेश
एक सहारा चिट्ठी और संदेश
घर में रहते अब एक ही एक।।1।।
यह कैसा बदल गया परिवेश
सबका बदला-बदला सा वेश।।2।।
सबका लगता मास्क जैसा फेस
अभी भी बचा हुआ है अवशेष।।3।।
एक सहारा चिट्ठी और संदेश
घर में रहते अब एक ही एक।।4।।
अकेला फोन करूं या भेजूं संदेश
नहीं कट रहा है ये अपना ब-ऐस।।5।।
'तरूण' हैं अपना तरूण-ब-ऐस
अब कैसे कटे ये दिन और शेष ।।6।।
✍✍✍तरुण यादव रघुनियां ✍✍✍
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