पिता से जीवन में बहार हैं

✍✍✍✍स्वरचित ✍✍✍✍
सोचने पर, और मांगने से पहले दे देते हैं
हर ख्वाब पूरा करते उसी को पिता कहते हैं।।
ऊंगलियों को सहारा देकर दुनिया धुमाते
मेरे हर हाव भाव को भर में समझते।।1।।

अपना भूखा है प्यासा फर्क नहीं पड़ता
मेरे लिए हमेशा भोजन का इंतजाम करता
सोचने पर, और मांगने से पहले दे देते हैं
हर ख्वाब पूरा करते उसी को पिता कहते हैं।।2।।

जबतक रहता जीवन पिता के साये में
हर दुख तकलीफ से बेफिक्र रहता।
सोचने पर, और मांगने से पहले दे देते हैं
हर ख्वाब पूरा करते उसी को पिता कहते हैं।।3।।

जहाँ भी जाते मेरे लिए ही सोचते रहते
जब घर आते तो कुछ लेकर आते हम खुश हो जाते।
सोचने पर, और मांगने से पहले दे देते हैं
हर ख्वाब पूरा करते उसी को पिता कहते हैं।।4।।

पिता हैं पालनकर्ता,सुखदाता, संकटहर्ता
हर दुख को हरने हमेशा तैयार रहता
सोचने पर, और मांगने से पहले दे देते हैं
हर ख्वाब पूरा करते उसी को पिता कहते हैं।।5।।

पिता से जीवन में किलकार और बहार हैं
जिसके ऊपर साया पूछो जिंदगी अंधार है
सोचने पर, और मांगने से पहले दे देते हैं
हर ख्वाब पूरा करते उसी को पिता कहते हैं।।

#happy father's day 

🙏🙏🌷पिता के चरणों में अर्पित कविता 🌷🙏🙏
✍✍✍तरुण यादव रघुनियां ✍✍✍

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