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Showing posts from April, 2020

सुंदर पावन तन

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✍✍✍स्वरचित ✍✍✍ कितना सुंदर पावन तन जाग सबेरे कर भजन । अंत समय आयेगा काम तू नहीं जायेगा यमग्राम।।1।। हर वक्त कर नाम सुमिरण इसी के लिए मिला नरतन माया की बिषलहरी में डूब ना जाना चौरासी का चक्कर पड़ेगा लगाना ।।2।। मानस योग से अंधकार मिटेगा थोड़ा सुख का अनुभूति होगा जिंदगी में यही से सबेरा होगा तब सदगुरु द्वार रास्ता लखेगा ।।3।। यह संसार हैं बिषलहरी का धाम जो नहीं संभला जायेगा यमग्राम छोड़ चलो   पाप पुण्य का धाम  त्रिकुटी महल बैठे करो ध्यान ।।4।। पंचपाप षट विकार का करो त्याग तब होगा प्रभु परमेश्वर से अनुराग धीरे-धीरे करो नित ध्यानाभ्यास एक दिन मिलेगा ज्योति प्रकाश ।।5।।  त्रिकुटी महल बैठे करो ध्यान सावधान हो करो निज काम जीते जी ही पायेगा  निर्वाण तब होगा जीवन का कल्याण ।।6।। तरुण करो,उम्र का छोड़ो विचार पता नहीं कब जायेगा स्वर्गसिधार सुमिरण भजन का बना लो संस्कार यही एक रास्ता है मुक्ति का द्वार ।।7।। ✍✍✍✍तरुण यादव रघुनियां ✍✍✍✍

वक्त यूँ ही न बर्बाद कर

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✍✍✍स्वरचित ✍✍✍ ये वक्त यूँ ही नहीं बर्बाद कर कुछ काम कर कुछ काम कर। उगता सूरज भी ढल जायेगा तुम यूँ देखता ही रह जायेगा। ये वक्त यूँ ही नहीं बर्बाद कर कुछ काम कर कुछ काम कर। 1।। जग में कुछ ऐसा तो नाम कर जीवन के लिए कुछ काम कर वक्त के साथ यूँ ही ढलना सीख जीने के लिए कुछ करना सीख ये वक्त यूँ ही नहीं बर्बाद कर कुछ काम कर कुछ काम कर।।2।। तेरे अंदर फौलादी लहू दौड़ रहा अभी तक क्यों हैं तू मौन पड़ा। तुम  पत्थर को तोड़ सकता है  तूफान के रूख मोड़ सकता है ये वक्त यूँ ही नहीं बर्बाद कर कुछ काम कर कुछ काम कर।।3।। सीखने के लिए अनेक मिसाल है संत,विद्वान,ज्ञानी,समय याद है । शिवाजी,गुरु गोविन्द जी याद है बोस,गांधी,मांझी,जिंदा मिसाल है। ये वक्त यूँ ही नहीं बर्बाद कर कुछ काम कर कुछ काम कर।।4।। कलाम,भाभा,अंबेडकर मिसाल है राजेंद्र प्रसाद,दिनकर,रेणु याद है । बुद्ध,कबीर,नानक,मेंहीं मिसाल है ऐसे अनेकों जिंदा पड़ा मिसाल है। ये वक्त यूँ ही नहीं बर्बाद कर कुछ काम कर कुछ काम कर।।5।। अपने सपने को साकार हैं   जिंदगी न तार तार कर आलस,दुर्बुद्धि,भय ...

नशीली आंखों ने कैद कर लिया

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✍✍✍स्वरचित गजल ✍✍✍ जब मैनें उनकी आंखो में देखा । प्रेमग्रंथ के हर पन्ने को पढ लिया।।1।। उनकी आंखों का अनोखा जादू मानो दिल पर प्रेमपत्र लिख दिया।।2।। आंखों में थी एक अजब नशा मैं उसमें डूबता ही  चला गया ।।3।। नशीली आंखों ने कैद कर लिया अंदर एक जुनून को ला दिया ।।4।। लब्ज़ों पर अनायास शब्द आया मैं तो प्रेम का दीवाना हो गया ।।5।। शर्बती आंखों ने चैन छीन लिया ये यादें मुझको बैचेन कर दिया ।।6।। किसी शायरों ने सच ही कहा हैं जो आंखों में डूबा दीवाना हो गया।।7।। ये नशा तो याद ही छीन लिया ''तरूण''हालत- ए-बदल गया ।।8।। ✍✍✍✍तरुण यादव रघुनियां ✍✍✍

प्रकृति की सुन्दरता

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✍✍✍✍✍स्वरचित ✍✍✍✍ प्रकृति की सुन्दरता देख करो विचार पेड़, पर्वत, नदियाँ ये कैसी उपहार ।। नयी नयी कोमल कलियाँ लेकर होंठों  पर खुशियाँ ।।1।। प्रकृति की सुन्दरता देख करो विचार हरा भरा वातावरण से स्वस्थ संसार ये हवाएं डाली को सहलाती मंद मधुर मधुर गीत सुनाती।।2।। प्रकृति की सुन्दरता देख करो विचार चारो ओर हरियाली है अनुपम उपहार। बादल आकाश को चुमती फिर  झमझम बर्षा करती।।3।। मन में उमंग भरा है अद्भुत ये संसार हरा भरा है वन,उपवन सुंदर बहार।। कहता है ये वन ,उपवन स्वस्थ रहें सबका जीवन।।4।। प्रकृति की सुन्दरता देख करो विचार जग में हम हैं,हम से ये सारा संसार पेड़ पौधे की डाली हैं चारो ओर हरियाली है।।5।। प्रकृति की सुन्दरता देख करो विचार सुंदर घटा पर ,नहीं  कोई करो वार।। पर्यावरण को स्वच्छ रखें हम जीवन से बीमार दूर करें हम।।6।। प्रकृति की सुन्दरता देख करो विचार तरुण मत सोचो,करो प्रकृति से प्यार स्वस्थ जीवन हैं अनुपम उपहार मत करो अब  इनसे  खिलवाड़।।7।। ✍✍✍✍तरुण यादव रघुनियां ✍✍✍✍

हिम्मत से मंजिल पायेगा

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✍✍✍स्वरचित ✍✍✍ तू इस प्रकृति का रत्न करके देखो रत्न सब बाधा पार कर जायेगा अपना सुहाना मंजिल पायेगा।।1।। तू है खुदा का नूर ज्ञान से हैं भरपूर जब जोर से हिम्मत लगायेगा अपना सुहाना मंजिल पायेगा।।2।। प्रकृति में एक हो तुम सबसे विशेष हो तुम अंदर झांक,प्रकृति साथ निभायेगा तू अपना जरूर मंजिल पायेगा ।।3।। तुम ऋषि के संतान हो तुम ज्ञान के भंडार हो जब आत्मविश्वास से हिम्मत लगायेगा तेरा मंजिल तेरे पीछे पीछे आयेगा ।।4।। तुम माँ भारती के संतान हो तुम एक हकीकत पैगाम हो जब आत्मगौरव से हिम्मत लगायेगा तेरा मंजिल पीछे दौरे दौरे आयेगा ।।5।। अभी तो तरूण हो दया और करुण हो जब आत्मविश्वास हिम्मत लगायेगा मंजिल तेरा  पीछे दौरे दौरे आयेगा ।।6।। ✍✍✍तरुण यादव रघुनियां ✍✍✍✍

मजदूर

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ये उम्र तो ढल रही है । जज्बा कम न हुई है ।। दुःख सहना पड़ता है।  बोझ उठाना पड़ता है ।।1।। अपने तो छोटे बच्चे हैं। सुबह से भूखे प्यासे हैं । आने वक्त बहुत रोये हैं  अभी तक भूखे सोये हैं।।2।। रूपये कमा कर ले जायेंगे बाजार से शब्जी लेते जायेंगे। जाकर फिर भोजन बनायेंगे  अपने बाबू को खिलायेंगे।।3।।

सदगुरू ने किया बड़ा उपकार

सदगुरू ने किया बड़ा उपकार बता दिये हैं संतमत का सार ।। घर घर में किया ज्ञान प्रचार । भक्ति करो तब होगा उद्धार ।।1।।सतगुरु ....... ये संसार हैं माया की जेल नित रचता दुःख की खेल ।। कलियुग में सदगुरू आधार वही करेंगे भव सिन्धु पार।।2।।सतगुरु ....... नित करो प्रभु का भजन कट जायेगा आवागमन । कलयुग में नाम आधार माया से पायेगा पार ।।3।।सतगुरु ...... नित -प्रति सत्संग में जाओ अपना जीवन सफल बनाओ। होगा सार असार का ज्ञान तब होगा तुम भक सियान।।4।।सतगुरु ...... संसार में दुख- पातक भारी कर ले मनवा गुरुनाम सवारी हो जायेगा जीवन सुखकारी सदगुरू की बड़ी बलिहारी गुरू ध्यान से ही होगा ज्ञान अंधकार का कटेगा जाम।। 5।।सतगुरु .......

प्यार है

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ये वीरान चेहरे कहता हैं तुम मुझसे प्यार करता है। सामने से यूँ मुस्कराते हो बगल से हमको चिढाते हो।।1।। तेरे लब्ज़ों की पहचान है तेरे बातों में एक जान हैं । मेरा दिल   यही कहता है तुम मुझसे प्यार करता है ।।2।। रात में स्वप्न देखता हूँ तेरे बाहों में रहता हूँ । मेरा धड़कन भी कहता है तुम मुझसे प्यार करता है ।।3।। ये आंखें शरारत करती हैं तुझे देखने को तरसती हैं। ये होठ उच्चारण करता है तुम मुझसे प्यार करता है ।।4।। ये हवाएं जब चलती हैं मेरे बालों से कहती हैं । इतना क्यों बलखाती हैं रह रह कर मुस्कराती है । ये बाल भी यही कहता है तुम मुझसे प्यार करता है ।।5।। ये मेरी जो  जवानी है आपका ही दिवानी है रह रह कर सुनाती है आपका का प्यासी है यौवन भी यही कहता है तुम मुझसे प्यार करता है ।।6।। कान कुछ नहीं सुनता है आपका बात कहता है वो बहुत  याद करता हैं बिन तेरे बहुत तरपता हैं ये कान भी यही कहता है तुम मुझसे प्यार करता है ।।7।। ✍✍✍तरुण यादव रघुनियां ✍✍✍

अब नमस्ते

कोरोना अमेरिका में किया जंप बेचारे ट्रंप में मच गया हड़कंप।।1।। जो अपने को बादशाह बताते थे  और कोरोना का मजाक उराते थे।।2।। हाथ मिलाने से नहीं कतराते थे प्यार से गले सब को  लगाते थे।।3।। क्यों ट्रंप साहब मुँह लटकाये हो  3 बार अपना टेस्ट करवाया हो।।4।। कोरोना ने कहा जब से यहाँ आयी हूँ  कितने हजारों को मौत से सुलायी हूँ।।6।। ट्रंप को house में रहने को किया मजबूर  अब तो नमस्ते करते,गले मिलना गया दूर।।7।।

जय जय बजरंगबली

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प्रभु के भक्त,ज्ञानी ध्यानी गंभीर  जय हो महावीर,जय हो महावीर।।1।। राम के दूत ,माता अंजनि के पुत्र  ज्ञान बुद्धि के सागर, हे पवनसुत।।2।। सुमति के दाता,कुमति को हर्ता महावीर नाम ,सब भय को हर्ता।।3।। राम दूत, माता सीता के प्यारे सब मुख से महावीर पुकारे।।4।। सुबह शाम,महावीर नाम जपे सब दुख मिटें,अंतर दृष्टि खुले।।5।। जय महावीर,जय जय महावीर  'तरूण' पर कृपा करो महावीर।।6।। ✍✍✍तरुण यादव रघुनियां ✍✍✍

आओ दिया जलाएं

आओ सब मिल एक दिया जलाएं अंदर बाहर के अंधकार को मिटाएं।।  आओ मिलकर एक दिया जलाएं  एकता का संदेश सबको बताएं ।। एकता का गीत सब मिलकर गाए  आओ सब मिल एक दिया जलाएं।।  सभी वैमनस्यता,अहंकार को जलाएं  आओ सब मिल एक दिया जलाएं ।। पूरी दुनिया को एक नया पाठ पढ़ाएं  आओ सब मिल एक दिया जलाएं ।। आओ सब मिल प्रेम के गीत गाएं  आओ सब मिल एक दिया जलाएं।।  तरुण सबों से एक यही है अपेक्षाएं  आओ सब मिलकर दिया जलाएं।।

सहारा चिट्ठी और संदेश

 एक सहारा चिट्ठी और संदेश घर में रहते  अब एक ही एक।।1।। यह कैसा बदल गया परिवेश सबका बदला-बदला सा वेश।।2।। सबका लगता मास्क जैसा फेस अभी भी बचा हुआ  है अवशेष।।3।। एक सहारा चिट्ठी और संदेश घर में रहते  अब एक ही एक।।4।। अकेला फोन करूं या भेजूं संदेश नहीं कट रहा है ये अपना ब-ऐस।।5।। 'तरूण' हैं अपना तरूण-ब-ऐस अब कैसे कटे ये  दिन और शेष ।।6।। ✍✍✍तरुण यादव रघुनियां ✍✍✍

सुखी होंठ

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✍✍✍स्वरचित ✍✍✍ -:आइये लाकडान में कुछ इंज्वाय करे:- सूखी होठों पर मुस्कान आयेगा  पतझड़ में बहार छा जायेगा ।। ये वीरान दशा भी मिट जायेगा  चारों ओर हंगामा नजर आयेगा।। इस विपत्ति में घर में रह जायेगा  शहंशाह,हीरो वही कहलायेगा।। भाई अपना भी टाइम आयेगा  ये महामारी छू मंतर हो जायेगा।। जब लाॅकडान खत्म हो जायेगा दिल्ली में प्रदूषण फिर  छायेगा।। ✍✍✍तरुण यादव रघुनियां ✍✍✍ अच्छा लगे तो कमेंट्स देना ना भूलियेगा 

जय श्रीराम

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सब के अंदर एक ही राम  प्रेम से बोलो जय श्री राम ।।1।। सभी के बनते बिगड़े काम प्रेम से बोलो जय श्री राम ।।2।। सुबह शाम लो प्रभु का नाम  भक्त भी भजते जय श्री राम।।3।। आनंद के सागर प्रभु का नाम  सभी को तारे एक ही राम।।4।। प्रेम से बोलो जय श्री राम  नैया पार करेंगे प्रभु  नाम ।।5।। जग का पालन करें प्रभु राम  जीवन मुक्त करावे प्रभु नाम।।6।। सब मिलकर करो प्रभु ध्यान  हृदय से बोलो जय श्री राम ।।7।। ''तरुण''करते है यही पुकार आवागमन मिटा दो अबकी बार।।8।। सब के घट घट एक ही राम  प्रेम से लेलो प्रभु का नाम ।।9।। ✍✍✍तरुण यादव रघुनियां ✍✍✍

वीरान सड़के

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वीरान सड़के कुछ कह रही है  ये दुनिया जरूर बदल रही हैं ।। ये आँखे भी कुछ कह रही हैं  वक्त की पाबंदियां सह रही हैं।। यह चेहरा भी कुछ कह रही हैं  कितां सुकू महसूस कर रही है।। ये बादल भी कुछ कह रही हैं  आज ये जग सूना लग रही हैं।। वीरान रास्ता कुछ कह रही हैं  सचमुच दिल की धाव नयी हैं ।। ✍✍✍तरुण यादव रघुनियां ✍✍✍